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रणनीतिक मूल्यांकन रिपोर्ट: राष्ट्रीय जल आपूर्ति कार्यक्रम और वैश्विक जल न्याय की दिशा

 



दिनांक: 5 फरवरी, 2026 विषय: जल बुनियादी ढांचा पहलों, कार्यात्मक मेट्रिक्स और वैश्विक जल अर्थव्यवस्था का रणनीतिक विश्लेषण

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1. प्रस्तावना: जल प्रबंधन का बदलता वैश्विक परिदृश्य

मानव इतिहास में पहली बार, वैश्विक जल विज्ञान चक्र (Hydrological Cycle) असंतुलित हो गया है, जिससे वैश्विक पारिस्थितिक स्थिरता और आर्थिक भविष्य पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। एक वरिष्ठ नीति रणनीतिकार के रूप में, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि जल अब केवल एक स्थानीय मुद्दा नहीं है; इसे एक 'वैश्विक सार्वजनिक वस्तु' (Global Common Good) के रूप में प्रशासित किया जाना चाहिए। यहाँ 'ब्लू वॉटर' (नदियों और झीलों का दृश्य जल) और 'ग्रीन वॉटर' (मिट्टी और वनस्पतियों में संचित नमी) के बीच के महत्वपूर्ण अंतर को समझना तकनीकी रूप से अनिवार्य है। 'ग्रीन वॉटर' न केवल कार्बन के भंडारण के लिए आवश्यक है, बल्कि 'स्थलीय नमी पुनर्चक्रण' (Terrestrial Moisture Recycling) के माध्यम से यह भूमि पर होने वाली लगभग आधी वर्षा का स्रोत भी है। जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता की हानि और जल संकट का अंतर्संबंध एक आत्म-सुदृढ़ीकरण चक्र (self-reinforcing cycle) बनाता है; इसलिए, जल सुरक्षा को संबोधित करना हमारे जलवायु लक्ष्यों और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति के लिए प्राथमिक शर्त है।

2. केस स्टडी: जल जीवन मिशन (JJM) की प्रगति का विश्लेषण

भारत का 'जल जीवन मिशन - हर घर जल' वैश्विक दक्षिण (Global South) के लिए बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे के कार्यान्वयन का एक रणनीतिक ब्लूप्रिंट बन गया है। यह मिशन न केवल इंजीनियरिंग की उपलब्धि है, बल्कि सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का एक सशक्त माध्यम भी है।

प्रगति का तुलनात्मक विवरण (अगस्त 2019 - जनवरी 2026):

  • अगस्त 2019: मिशन के शुभारंभ के समय, केवल 3.23 करोड़ ग्रामीण परिवारों (16.72%) के पास नल कनेक्शन उपलब्ध थे।
  • 28 जनवरी, 2026 तक: राज्यों द्वारा दी गई रिपोर्ट के अनुसार, 15.79 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों (81.57%) को उनके घरों में नल से जल की आपूर्ति सुनिश्चित कर दी गई है।

वित्तीय ढांचा और विस्तार:

  • कुल परिव्यय: ₹3.60 लाख करोड़ (केंद्र का हिस्सा ₹2.08 लाख करोड़)।
  • वित्तीय वर्ष 2025-26: केंद्रीय बजट में ₹67,000 करोड़ का आवंटन।
  • रणनीतिक विस्तार: सरकार ने चल रहे कार्यों को पूरा करने और सेवा वितरण में पूर्णता लाने के लिए मिशन की समय सीमा को बढ़ाकर दिसंबर 2028 कर दिया है।

बुनियादी ढांचे के इस अभूतपूर्व विस्तार के बाद, अब रणनीतिक ध्यान भौतिक पहुंच से हटकर आपूर्ति की गुणवत्ता और निरंतरता पर केंद्रित होना चाहिए।

3. कार्यात्मक मेट्रिक्स और गुणवत्ता मानकों का मूल्यांकन

"कार्यक्षमता मूल्यांकन 2024" (Functionality Assessment 2024) के डेटा से प्राप्त निष्कर्ष नीतिगत दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यह मूल्यांकन बुनियादी ढांचे की भौतिक उपस्थिति और वास्तविक सेवा वितरण के बीच के अंतराल को प्रकट करता है।

तालिका: कार्यक्षमता मूल्यांकन 2024 के प्रमुख आंकड़े

मेट्रिक्स

उपलब्धि (प्रतिशत में)

कार्यशील नल कनेक्शन (Working Connections)

86.5%

नियमित आपूर्ति (Regularity)

83.6%

पर्याप्त मात्रा में जल (Adequate Quantity)

80.2%

गुणवत्ता मानक अनुपालन (Quality Standards)

76%

रणनीतिक विश्लेषण और प्रभाव: आंकड़ों का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि जहाँ भौतिक पहुंच में सुधार हुआ है, वहीं केवल 76% घरों को ही निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप जल प्राप्त हो रहा है। गुणवत्ता मानकों और भौतिक पहुंच के बीच का यह 24% का अंतराल (Quality Gap) ही वह प्रमुख कारण है जिसके लिए मिशन को दिसंबर 2028 तक विस्तारित किया गया है। गुणवत्ता अनुपालन में कमी सीधे तौर पर जल जनित रोगों के माध्यम से जन स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, जिससे मानव पूंजी की उत्पादकता कम होती है और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय में वृद्धि होती है।

4. प्रणालीगत बाधाएं और तकनीकी सीमाएं

जल सुरक्षा की राह में मौजूद चुनौतियाँ बहुआयामी हैं। राज्यों ने 'जियोजेनिक संदूषण' (Geogenic Contamination), दुर्गम भौगोलिक क्षेत्रों में बिखरी हुई बस्तियां और तकनीकी क्षमता की कमी जैसे मुद्दों को प्रमुख बाधाओं के रूप में पहचाना है। इसके अतिरिक्त, वैधानिक मंजूरी में देरी और बढ़ती सामग्री लागत परियोजनाओं के निष्पादन को धीमा करती है।

रणनीतिक समाधानों का मूल्यांकन: सरकार ने इन प्रणालीगत बाधाओं को दूर करने के लिए विशेष उपाय किए हैं:

  • त्वरित मंजूरी: वैधानिक बाधाओं को दूर करने के लिए विशेष रूप से 'नोडल अधिकारियों' की नियुक्ति की गई है।
  • पूंजीगत सहायता: राज्यों को वित्तीय मजबूती प्रदान करने के लिए 'पूंजीगत व्यय के लिए विशेष सहायता' (Special Assistance for Capital Expenditure) योजना लागू की गई है।
  • कौशल विकास: स्थानीय स्तर पर संचालन और रखरखाव (O&M) सुनिश्चित करने के लिए 'नल जल मित्र' कार्यक्रम के माध्यम से तकनीकी कौशल को सशक्त किया गया है।
  • स्रोत स्थिरता: 'जल शक्ति अभियान: कैच द रेन' के तहत सामुदायिक नेतृत्व में जल संरक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है।

5. जल न्याय और 2030 के वैश्विक लक्ष्य: बाल मृत्यु दर का अंत

वैश्विक जल न्याय के ढांचे के भीतर, सुरक्षित जल तक पहुंच एक बुनियादी मानव अधिकार और नैतिक अनिवार्यता है। वर्तमान आंकड़े भयावह हैं: असुरक्षित जल और स्वच्छता के अभाव के कारण प्रतिदिन 1,000 से अधिक बच्चों की मृत्यु हो जाती है। 2030 तक इस अकाल मृत्यु दर को समाप्त करना 'ग्लोबल वॉटर जस्टिस फ्रेमवर्क' का प्राथमिक लक्ष्य होना चाहिए।

लैंगिक समानता और गरिमापूर्ण जीवन का पैमाना: विश्व जल दिवस 2026 की थीम "जल और लैंगिक समानता" (Water and Gender) जल संकट के लिंग-आधारित प्रभाव को उजागर करती है। यह एक कड़वा तथ्य है कि विश्व स्तर पर महिलाएं और लड़कियां जल एकत्र करने में प्रतिदिन 20 करोड़ (200 million) घंटे खर्च करती हैं।

इसके अतिरिक्त, जल न्याय के सिद्धांत को केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रखा जा सकता। जहाँ जीवित रहने के लिए 50-100 लीटर जल आवश्यक है, वहीं एक 'गरिमापूर्ण जीवन' (Dignified Life)—जिसमें पर्याप्त पोषण और उपभोग शामिल हो—के लिए प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 4,000 लीटर जल की आवश्यकता होती है। जब तक नीतिगत ढांचे इस स्तर की जल सुरक्षा सुनिश्चित नहीं करते, तब तक 'न्याय' का लक्ष्य अधूरा रहेगा।

6. भविष्य की दिशा: एक नई जल अर्थव्यवस्था और वैश्विक जल समझौता

भविष्य की जल सुरक्षा के लिए जल के अर्थशास्त्र को फिर से परिभाषित करना अनिवार्य है। हमें '3-E' फ्रेमवर्क—दक्षता (Efficiency), समानता (Equity), और पर्यावरणीय स्थिरता (Environmental Sustainability)—को एक-दूसरे के पूरक के रूप में लागू करना होगा।

रणनीतिक सिफारिशें:

  1. सर्कुलर वॉटर इकोनॉमी: 2030 तक पाइपलाइन लीकेज और 'नॉन-रेवेन्यू वॉटर' (NRW) को आधा करने का लक्ष्य रखना चाहिए। इसके साथ ही, 50% अपशिष्ट जल के पुनर्चक्रण (Recycling) को अनिवार्य बनाया जाए ताकि प्रत्येक बूंद का मूल्य सुनिश्चित हो सके।
  2. विकेंद्रीकृत समाधान: दूरदराज के क्षेत्रों के लिए विकेंद्रीकृत जल उपचार प्रणालियों और वर्षा जल संचयन को प्राथमिक बुनियादी ढांचे के रूप में विकसित किया जाए।
  3. ग्लोबल वॉटर पैक्ट (वैश्विक जल समझौता): एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय समझौते की आवश्यकता है जो न केवल नदियों (Blue Water) बल्कि 'वायुमंडलीय नमी प्रवाह' (Atmospheric Moisture Flows) को भी अपनी नीतियों में शामिल करे। वर्तमान सीमा पार जल कानून केवल सतही जल तक सीमित हैं, जो 'ग्रीन वॉटर' के महत्व को नजरअंदाज करते हैं।

अंतिम आह्वान: जल नीति को केवल 'इंजीनियरिंग और पाइप बिछाने' के संकीर्ण नजरिए से निकालकर 'न्याय' और 'स्थिरता' के व्यापक सिद्धांतों पर आधारित करना होगा। जल प्रबंधन अब केवल एक विकासपरक विकल्प नहीं, बल्कि मानवता के अस्तित्व की अनिवार्य शर्त है।

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