गैर-मानवीय प्राइमेट संज्ञानात्मक प्रतिनिधित्व और स्वांग (Pretense) की पद्धतिगत समीक्षा
1. प्रस्तावना: पशु संज्ञान में स्वांग की रणनीतिक भूमिका
तुलनात्मक मनोविज्ञान में 'स्वांग' (Pretense) को वास्तविकता के 'द्वितीयक प्रतिनिधित्व' (Secondary Representation) के रूप में परिभाषित किया जाता है। यह केवल एक खेल नहीं, बल्कि एक उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक उपकरण है जो जीव को 'यहाँ और अभी' (here-and-now) की सीमाओं से मुक्त कर भविष्य के सिमुलेशन की अनुमति देता है। संज्ञानात्मक वैज्ञानिक कैथल ओ'मैडागेन (Cathal O’Madagain) के प्रसिद्ध तर्क के अनुसार, "यदि आप पहले साइकिल की कल्पना नहीं कर सकते, तो आप उसका आविष्कार नहीं कर सकते।" यही तर्क प्राइमेट नवाचार और उपकरण उपयोग पर भी लागू होता है। अमलिया बास्तोस (Amalia Bastos) और क्रिस्टोफर क्रुपेन्ये (Christopher Krupenye) द्वारा 2026 में 'साइंस' (Science) पत्रिका में प्रकाशित बोनोबो 'कूंज़ी' (Kanzi) के "इमेजिनरी टी पार्टी" शोध ने इस धारणा को जड़ से बदल दिया है कि कल्पना केवल मानव विशिष्टता है। यह क्षमता स्पष्ट करती है कि प्राइमेट मस्तिष्क केवल भौतिक उद्दीपनों पर प्रतिक्रिया नहीं करता, बल्कि एक आंतरिक मानसिक परिदृश्य का निर्माण और प्रबंधन कर सकता है। यह खंड स्वांग की इस सैद्धांतिक नींव से अगले खंड में प्रयुक्त विशिष्ट मूल्यांकन पैमानों की ओर संक्रमण करेगा।
2. मैक्यून पैमाने और विकासात्मक पदानुक्रम का गहन विश्लेषण
मैक्यून पैमाने (McCune Scale) की महत्ता कार्यात्मक वस्तु उपयोग (Functional Play) और प्रतीकात्मक स्वांग के बीच की सूक्ष्म सीमाओं को स्पष्ट करने में है। हालांकि, प्राइमेट्स के संदर्भ में हेइडी लिन (Heidi Lyn) और उनके सहयोगियों के 2006 के शोध ने एक महत्वपूर्ण पद्धतिगत संशोधन प्रस्तावित किया है। मानव बच्चों के विपरीत, प्राइमेट्स (विशेषकर Pan वंश) में मैक्यून के पाँच स्तरों के बजाय एक तीन-चरणीय विकासात्मक अनुक्रम (Three-step sequence) अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देता है: स्तर 1 (गैर-प्रतिनिधित्व), स्तर 2-4 (प्रतिनिधित्व), और अंततः स्तर 5 (सच्चा स्वांग)।
निम्नलिखित तालिका मैक्यून ढांचे और प्राइमेट-विशिष्ट 3-चरणीय अनुक्रम के संश्लेषण को दर्शाती है:
स्तर और नाम | 3-चरणीय अनुक्रम (Lyn et al., 2006) | संज्ञानात्मक परिभाषा | कूंज़ी/पनबनीशा शोध से उदाहरण |
स्तर 1: पूर्व-प्रतीकात्मक (Presymbolic) | चरण 1: गैर-प्रतिनिधित्व (Non-representational) | वस्तु के भौतिक उपयोग की समझ, बिना किसी 'as-if' व्यवहार के। | कूंज़ी द्वारा खिलौनों या चित्रों को केवल छूना या उनके भौतिक गुणों की खोज करना। |
स्तर 2: आत्म-स्वांग (Self-pretend) | चरण 2: प्रतिनिधित्व (Representational) | स्वयं से जुड़ी गतिविधियों का स्वांग करना; भौतिक वास्तविकता का प्रारंभिक विस्तार। | कूंज़ी द्वारा भोजन के चित्र को चाटना और "लिप-स्मैकिंग" ध्वनि उत्पन्न करना। |
स्तर 3: एकल प्रतिनिधित्व (Single Rep.) | चरण 2: प्रतिनिधित्व (Representational) | अन्य पात्रों (जैसे गुड़िया) को शामिल करना या अन्य जीवों के व्यवहार का अनुकरण। | पनबनीशा द्वारा एक बंदर के हाथ-कठपुतली (Puppet) को अंगूर खिलाना। |
स्तर 4: संयोजी स्वांग (Combinatorial) | चरण 2: प्रतिनिधित्व (Representational) | एक ही योजना को कई पात्रों पर लागू करना या जटिल योजनाओं का संयोजन। | पनबनीशा द्वारा मुखौटा पहनना और फिर बारी-बारी से अलग-अलग शोधकर्ताओं का पीछा करना। |
स्तर 5: पदानुक्रमित स्वांग (Hierarchical) | चरण 3: सच्चा स्वांग (True Pretense) | आंतरिक योजना आधारित वस्तु प्रतिस्थापन और काल्पनिक वस्तुओं का निर्माण। | कूंज़ी द्वारा एक अदृश्य खिलौने को खींचना या खाली पात्र से 'काल्पनिक रस' डालना। |
विश्लेषणात्मक परत: स्तर 5 का पदानुक्रमित स्वांग पशु की आंतरिक मानसिक योजना को प्रमाणित करता है। यह स्तर सिद्ध करता है कि जीव भौतिक वस्तु की अनुपस्थिति में भी उसके गुणों को मानसिक रूप से सक्रिय रख सकता है। यह विकासात्मक ढांचा अब हमें लेस्ली के 'सच्चे' स्वांग के कड़े मानदंडों के परीक्षण की ओर ले जाता है।
3. लेस्ली के मानदंड और 'द्वितीयक प्रतिनिधित्व' का मूल्यांकन
एलेन लेस्ली (Alan Leslie) के अनुसार, स्वांग के लिए 'डीकप्लिंग' (Decoupling) या विच्छेदन अनिवार्य है। इसका अर्थ है कि जीव वास्तविक स्थिति (Primary Representation) और काल्पनिक स्थिति (Secondary Representation) को एक साथ मस्तिष्क में रख सके, बिना भ्रमित हुए। बास्तोस और क्रुपेन्ये (2026) के कूंज़ी पर किए गए प्रयोगों ने लेस्ली के तीन मानदंडों की कसौटी पर स्वांग का सफल परीक्षण किया:
- वस्तु प्रतिस्थापन और गुणों का आरोपण: जब शोधकर्ता ने खाली जग से खाली कप में 'काल्पनिक रस' उड़ेला, तो कूंज़ी ने न केवल उस अदृश्य वस्तु के अस्तित्व को स्वीकारा, बल्कि उसके स्थान को भी ट्रैक किया।
- काल्पनिक वस्तुएं (Imaginary Objects): कूंज़ी ने 68% मामलों में उस सही कप को चुना जिसमें काल्पनिक रस 'डाला' गया था। यह सफलता दर संयोग (50%) से काफी अधिक है।
- विच्छेदन का प्रमाण: सबसे महत्वपूर्ण डेटा बिंदु यह है कि जब कूंज़ी को असली रस और काल्पनिक रस के बीच विकल्प दिया गया, तो उसने 80% बार असली रस चुना। यह लेस्ली के 'सच्चे स्वांग' की परिभाषा को पुष्ट करता है—कूंज़ी को पता था कि रस काल्पनिक है, वह वास्तविकता और कल्पना के बीच भ्रमित नहीं था।
महत्व का विश्लेषण: "तो क्या?" परत यहाँ स्पष्ट है—कूंज़ी का 80% सफलता दर यह प्रमाणित करता है कि वह केवल शोधकर्ता की नकल नहीं कर रहा था, बल्कि उसके मस्तिष्क में 'मानसिक अनुकरण' (Mental Simulation) चल रहा था। यह पारिस्थितिक वैधता (Ecological Validity) की दृष्टि से क्रांतिकारी है।
4. अंतर-प्रजाति संचार और भाषाई 'पाड़' (Scaffolding)
भाषा और स्वांग के बीच का संबंध सह-उत्पादक है। लिन (2006) का तर्क है कि भाषा स्वांग को 'पैदा' नहीं करती, बल्कि उसे सामाजिक रूप से व्यक्त करने के लिए एक 'पाड़' या सहारा (Scaffolding) प्रदान करती है।
- भाषाई रूप से सक्षम प्राइमेट (कूंज़ी, पनबनीशा): लेक्सीग्राम के प्रशिक्षण ने उन्हें 'स्तर 5' और लेस्ली के 'सच्चे स्वांग' तक पहुँचने में सक्षम बनाया। वे काल्पनिक वस्तुओं (जैसे 'सांप') के बारे में योजना बना सकते थे क्योंकि उनके पास उस अमूर्त अवधारणा को व्यक्त करने का माध्यम था।
- गैर-भाषाई प्राइमेट (तमुली, मरकरी): जिन्हें लेक्सीग्राम का प्रशिक्षण नहीं मिला था, वे मानवीय प्रोत्साहन के बावजूद 'स्तर 4' तक ही सीमित रहे। उनका खेल अक्सर उनके प्राकृतिक व्यवहारों (जैसे थप्पड़ मारना या कुश्ती) का अनुकरण मात्र था और उनमें 'काल्पनिक वस्तुओं' के प्रति जागरूकता का अभाव था।
यहाँ निष्कर्ष यह निकलता है कि भाषा प्राइमेट्स को अपनी आंतरिक कल्पना को जटिल सामाजिक खेल में बदलने की अनुमति देती है, जिससे स्वांग 'प्रतिक्रियात्मक' (Reactive) से 'सक्रिय' (Active) बन जाता है।
5. पद्धतिगत चुनौतियां: संशयवाद और 'एन्कल्चरेशन'
प्राइमेट संज्ञान के क्षेत्र में वैज्ञानिक कठोरता के लिए विद्वानों की आलोचनाओं पर विचार करना अनिवार्य है:
- डेनियल पोविनेली (Daniel Povinelli) की आपत्ति: पोविनेली का तर्क है कि कूंज़ी केवल 'स्पर्श संकेतों' (Touch cues) या 'अंतिम स्पर्श' (Recency of touch) पर प्रतिक्रिया दे रहा होगा। क्या वह वास्तव में कल्पना कर रहा था या केवल शोधकर्ता के शारीरिक संकेतों को पढ़ रहा था?
- माइकल टोमासेलो (Michael Tomasello) की चुनौती: टोमासेलो का संशय अधिक गहरा है। उनका मानना है कि सच्चा स्वांग तब है जब जीव 'स्वयं' पहल करे (Ape-initiated)। वे कूंज़ी को स्वयं पानी उड़ेलने या स्वयं किसी स्वांग की शुरुआत करते देखना चाहते हैं, न कि केवल मानवीय 'टी पार्टी' में एक निष्क्रिय प्रतिभागी के रूप में।
- एन्कल्चरेशन (Enculturation) का कारक: एक बड़ी पद्धतिगत चुनौती 'मानव-परिवेशीय संवर्धन' (Enculturation) की है। कूंज़ी जैसे प्राइमेट्स "बोनोबों के आइंस्टीन" कहे जा सकते हैं क्योंकि उन्हें जन्म से मानव संस्कृति में पाला गया है। प्रश्न यह उठता है कि क्या ये क्षमताएं पूरी प्रजाति की हैं या केवल उन व्यक्तियों की जिन्हें मानवीय प्रशिक्षण की 'पाड़' मिली है।
6. संश्लेषण और विकासवादी निहितार्थ (Evolutionary Synthesis)
बास्तोस, क्रुपेन्ये और टाउनरो (Townrow) के शोधों का एकीकरण हमें मानव संज्ञान के विकासवादी इतिहास की नई व्याख्या देता है।
- साझा पूर्वज (Common Ancestry): यह डेटा संकेत देता है कि स्वांग और कल्पना की क्षमता संभवतः हमारे और बोनोबों के 6 से 9 मिलियन वर्ष पूर्व के साझा पूर्वजों में मौजूद थी।
- थ्योरी ऑफ माइंड (Theory of Mind): ल्यूक टाउनरो (Luke Townrow) के 2025 के अध्ययन ने दिखाया कि बोनोबो 'अज्ञानता' (Ignorance) को पहचान सकते हैं। वे उन भागीदारों के लिए अधिक और तेजी से इशारा (Pointing) करते हैं जिनके पास जानकारी का अभाव होता है। यह क्षमता लेस्ली के स्वांग के सिद्धांतों से गहराई से जुड़ी है—दूसरों के मानसिक राज्यों का प्रतिनिधित्व करना स्वांग की ही एक शाखा है।
- पदानुक्रमित निरंतरता: कार्यात्मक खेल से सच्चे स्वांग तक का विकास एक अखंड सातत्य है, जो यह सिद्ध करता है कि मानवीय कल्पना शून्य से उत्पन्न नहीं हुई थी।
अंतिम टिप्पणी: यह पद्धतिगत समीक्षा रेखांकित करती है कि बोनोबो अनुसंधान केवल पशु व्यवहार का अध्ययन नहीं है, बल्कि यह हमारे अपने "सुंदर और समृद्ध मस्तिष्क" के क्रमिक विकास का दर्पण है। कूंज़ी और अन्य भाषाई प्राइमेट्स हमें यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि यदि हम इन प्रजातियों के संरक्षण में विफल रहे, तो हम अपने स्वयं के संज्ञानात्मक मूल को समझने का अंतिम अवसर भी खो देंगे।