चीनी कशेरुकी जीवाश्म विज्ञान के पिता: डोंग झिमिंग की यात्रा

 


जीवाश्म विज्ञान (Palaeontology) केवल पुरानी हड्डियों को खोजने का नाम नहीं है, बल्कि यह बीते हुए युगों की कड़ियों को जोड़ने की एक महान कला है। इस कला के सबसे बड़े जादूगर थे—डोंग झिमिंग (Dong Zhiming)। उन्हें 'चीन के कशेरुकी जीवाश्म विज्ञान का पिता' और 'डायनासोर किंग' के रूप में जाना जाता है। एक छात्र के लिए डोंग की कहानी केवल विज्ञान की नहीं, बल्कि कूटनीति, दृढ़ता और विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी जिज्ञासा को जीवित रखने की प्रेरणा है।

डोंग झिमिंग का प्रभाव (Impact Highlight) डोंग झिमिंग ने चीन को डायनासोर अनुसंधान के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित किया। 1949 के बाद, जब चीन का शेष विश्व से वैज्ञानिक संपर्क टूट गया था, डोंग ने ही 1980 के दशक में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के दरवाजे फिर से खोले। उनके नाम 27 मान्य (valid) डायनासोर प्रजातियों के नामकरण का विश्व रिकॉर्ड है, जो उन्हें इतिहास का सबसे सफल डायनासोर नामकरणकर्ता बनाता है।

उनकी यह यात्रा एक छोटे से लड़के की जिज्ञासा से शुरू हुई थी जिसने दुनिया देखने का नजरिया बदल दिया।

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1. जिज्ञासा का जन्म: 13 वर्ष की आयु और हैड्रोसॉर (Hadrosaur)

1937 में चीन के शेडोंग प्रांत में जन्मे डोंग के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण क्षण 1950 में आया। 13 वर्ष की आयु में उन्होंने एक म्यूजियम में हैड्रोसॉर (Hadrosaur) के विशाल जीवाश्म देखे। उन विशालकाय हड्डियों ने उनके मन में यह सवाल पैदा किया—"ये जीव कैसे रहे होंगे?"

अंतर्दृष्टि (Insight): एक शिक्षक के रूप में मैं आपको बताना चाहता हूँ कि महान वैज्ञानिक रातों-रात नहीं बनते। डोंग का भविष्य उसी क्षण तय हो गया था जब उन्होंने पहली बार डायनासोर को देखा। यह हमें सिखाता है कि एक साधारण म्यूजियम यात्रा किसी के जीवन का उद्देश्य (Purpose) बन सकती है।

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2. गुरु का मार्गदर्शन और प्रारंभिक सफलता

1962 में स्नातक करने के बाद, डोंग ने 'चीन के कशेरुकी जीवाश्म विज्ञान के संस्थापक' यांग झोंग जियान के अधीन प्रशिक्षण शुरू किया। डोंग में सीखने की इतनी भूख थी कि उन्होंने अपने करियर के पहले तीन वर्षों (1962-1965) में ही लगभग 600 शैक्षणिक पत्र (Academic papers) लिख डाले। यह असाधारण उत्पादकता ही थी जिसने उन्हें भविष्य के कठिन समय के लिए तैयार किया।

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3. संघर्ष: खेतों से प्रयोगशाला तक का सफर

1965 में चीन की 'सांस्कृतिक क्रांति' और 'डाउन टू द कंट्रीसाइड मूवमेंट' के कारण डोंग का शोध रुक गया। उन्हें खेतों में काम करने के लिए भेज दिया गया। डोंग ने न केवल अपना करियर दांव पर लगाया, बल्कि उन्होंने और उनकी पत्नी चेन देझेन (जो स्वयं एक वैज्ञानिक थीं) ने अपने बच्चों को दादा-दादी के पास छोड़ दिया ताकि वे विज्ञान की सेवा जारी रख सकें।

चुनौतियां

जीवाश्म विज्ञान के प्रति समर्पण (Synthesis)

मजदूरी और निर्वासन: खेतों में काम करना पड़ा।

उन्होंने खेतों में काम करते हुए मिट्टी और चट्टानों का ऐसा बारीकी से अध्ययन किया जो बाद में जीवाश्म खोजने में काम आया।

सिंचाई परियोजनाएं: सिंचाई प्रणालियों के डिजाइन में लगा दिया गया।

इस कार्य के दौरान उन्होंने व्यापक भूगर्भीय सर्वेक्षण (Geological Surveys) किए, जिससे उन्हें उन इलाकों की गहरी समझ मिली जहाँ जीवाश्म छिपे थे।

संसाधनों का अभाव: वैज्ञानिक संस्थानों का बंद होना।

अपने गुरु के गुप्त प्रोत्साहन से उन्होंने निजी तौर पर शोध जारी रखा और हार नहीं मानी।

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4. दशानपू (Dashanpu) के खजाने की खोज

1970 के दशक के अंत में, डोंग ने सिचुआन के दशानपू में मध्य जुरासिक काल की चट्टानों में 'हड्डियों का बिस्तर' खोजा। यह पूरी दुनिया के लिए एक खजाना था क्योंकि मध्य जुरासिक काल के जीवाश्म वैश्विक स्तर पर अत्यंत दुर्लभ हैं।

उन्होंने सरकार को एक प्राकृतिक गैस सुविधा के निर्माण को रोकने के लिए राजी किया ताकि जीवाश्मों को बचाया जा सके। यहीं से उनके विद्रोही स्वभाव की झलक मिलती है।

दशानपू के महत्व के 3 मुख्य बिंदु:

  • विकास की कड़ी: इसने डायनासोर विकास के 'लापता काल' (Missing Gap) के रहस्यों को सुलझाया।
  • गैसोसॉरस (Gasosaurus) की कहानी: डोंग ने एक डायनासोर का नाम 'गैसोसॉरस' रखा। मंदारिन में 'गैस' का एक अर्थ "मुसीबत खड़ी करना" (making trouble) भी होता है—यह उन अधिकारियों पर एक व्यंग्य था जिन्होंने वहां गैस प्लांट बनाने के लिए उनकी खोज में अड़ंगा डाला था।
  • जिगोंग डायनासोर संग्रहालय: उनके प्रयासों से ही आज दुनिया के सबसे बड़े डायनासोर संग्रहालयों में से एक वहां खड़ा है।

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5. चीन-कनाडा डायनासोर परियोजना (CCDP): एक कूटनीतिक जीत

1986-1991 के बीच डोंग ने इस विशाल परियोजना का नेतृत्व किया। यह 1949 के बाद चीन और पश्चिम के बीच पहला बड़ा वैज्ञानिक सहयोग था। इसमें फिलिप जे. करी जैसे दिग्गज शामिल थे। डोंग ने वहां 'डायनामाइट' का उपयोग करके जीवाश्म निकालने की तकनीक दिखाई, जिससे उनके विदेशी साथी हैरान रह गए—यह तरीका तेज था और जीवाश्मों को नुकसान भी नहीं पहुंचाता था।

प्रमुख खोज

वैज्ञानिक और ऐतिहासिक महत्व

Mamenchisaurus sinocanadorum

चीन और कनाडा के सहयोग के सम्मान में नामित एक विशालकाय जीव।

Sinraptor dongi

डोंग के सम्मान में 'डोंगी' नाम दी गई एक शिकारी प्रजाति।

कूटनीतिक सेतु:

इस परियोजना ने विज्ञान को अंतरराष्ट्रीय दोस्ती के माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया।

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6. आंकड़ों के पीछे का सच: एक महान नामकरणकर्ता

डोंग ने 42 से अधिक जेनेरा (genera) का वर्णन किया। हालांकि वे कुल नामकरण में चौथे स्थान पर हैं, लेकिन 'मान्य नामों' (Valid Names) के मामले में वे दुनिया में नंबर 1 हैं। यह उनकी गुणवत्ता और बारीकी को दर्शाता है।

  • वैज्ञानिक बहस: डोंग ने 'सेग्नॉसॉरिचिया' (Segnosaurischia) नामक डायनासोर के एक तीसरे समूह का सिद्धांत दिया था। हालांकि बाद में विज्ञान ने उन्हें 'थेरोपोड्स' (Theropods) माना, लेकिन डोंग का यह तर्क दिखाता है कि विज्ञान में चुनौती देना और बहस करना कितना महत्वपूर्ण है।
  • जुरासिक पार्क कनेक्शन: उन्होंने एक डायनासोर का नाम T. nedegoapeferima रखा। यह नाम फिल्म जुरासिक पार्क के मुख्य कलाकारों (Neill, Dern, Goldblum, Attenborough, Peck, Ferrero, Richards, Mazzello) के नामों के पहले अक्षरों से बना एक एक्रोनियम (Acronym) है, क्योंकि स्टीवन स्पीलबर्ग ने शोध के लिए दान दिया था।

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7. हओलोंग डोंगि (Haolong dongi): भविष्य की एक श्रद्धांजलि

डोंग झिमिंग का निधन 20 अक्टूबर 2024 को हुआ, लेकिन उनकी विरासत 2026 में खोजी गई प्रजाति Haolong dongi (हओलोंग डोंगि) के रूप में अमर हो गई।

  • स्पाइनी ड्रैगन: यह 125 मिलियन वर्ष पुराना एक 'इगुआनोडोन्टिया' था, जिसकी त्वचा पर खोखले कंटीले कांटे (hollow cutaneous spikes) थे, जो साही के कांटों (porcupine quills) जैसे थे।
  • आधुनिक तकनीक: इस प्रजाति का अध्ययन करने के लिए सिंक्रोट्रॉन (Synchrotron) तकनीक का उपयोग किया गया, जिससे वैज्ञानिकों ने कोशिका के स्तर (cellular level) तक का विश्लेषण किया। यह डोंग जैसे पारंपरिक खोजकर्ता को आधुनिक तकनीक की ओर से एक अनोखी श्रद्धांजलि है।

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निष्कर्ष: 'चीन के डायनासोर किंग' की अमर विरासत

डोंग झिमिंग का जीवन हमें सिखाता है कि विज्ञान केवल एक पेशा नहीं, बल्कि एक जुनून है। उन्होंने खेतों में काम करते हुए भी वैज्ञानिक दृष्टि नहीं खोई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन का नाम रोशन किया।

लर्निंग समरी (Learning Summary) डोंग झिमिंग के जीवन के 3 सबसे प्रेरक गुण:

  1. अनुकूलनशीलता (Adaptability): उन्होंने अपनी कठिन सिंचाई ड्यूटी को भूगर्भीय सर्वेक्षण में बदल दिया।
  2. गुणवत्ता पर ध्यान (Rigour): वे केवल नाम देने के लिए नाम नहीं देते थे, बल्कि उनके द्वारा खोजे गए अधिकांश नाम आज भी मान्य हैं।
  3. वैश्विक सोच (Global Vision): उन्होंने विज्ञान को देशों के बीच की दूरियां मिटाने का माध्यम बनाया।