वानरों की कल्पना: 'सेकेंडरी रिप्रेजेंटेशन' और मानसिक जीवन का एक परिचय

 


1. प्रस्तावना: 'यहाँ और अभी' की सीमाओं को तोड़ना

संज्ञानात्मक प्राइमेटोलॉजी में 'कल्पना' का अर्थ केवल मानसिक खेल नहीं है, बल्कि यह 'यहाँ और अभी' (here-and-now) की भौतिक सीमाओं से परे जाने की क्षमता है। इसे वैज्ञानिक शब्दावली में 'सेकेंडरी रिप्रेजेंटेशन' (Secondary Representation/द्वितीयक प्रतिनिधित्व) कहा जाता है। यह एक ऐसी उच्च-स्तरीय मानसिक प्रक्रिया है जो मस्तिष्क को वास्तविकता से 'डिकपल' (decouple) यानी अलग होकर उन स्थितियों या वस्तुओं के बारे में सोचने की अनुमति देती है जो वर्तमान में भौतिक रूप से मौजूद नहीं हैं।

एक शैक्षिक दृष्टिकोण से, यह क्षमता निम्नलिखित जटिल प्रक्रियाओं की आधारशिला है:

  • भविष्य की योजना (Future Planning): उन संभावनाओं का मानसिक अनुकरण करना जो अभी घटित नहीं हुई हैं।
  • थ्योरी ऑफ माइंड (Theory of Mind): दूसरों के मानसिक स्तर को समझना और यह जानना कि उनका ज्ञान या दृष्टिकोण हमसे भिन्न हो सकता है।
  • प्रतीकात्मक सोच (Symbolic Thinking): एक वस्तु का उपयोग दूसरी अदृश्य वस्तु के प्रतीक के रूप में करना।

यह क्षमता केवल मनुष्यों का विशेषाधिकार नहीं है। हमारे निकटतम जीवित संबंधी—बोनोबो और चिंपांजी—के साथ हम एक 'क्लेड' (Clade) बनाते हैं, जिसका अर्थ है कि यह क्षमता हमारे साझा पूर्वजों में लाखों वर्षों से मौजूद रही होगी।

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2. मुख्य पात्र: कान्जी—एक 'एन्कल्चरेटेड' बोनोबो

इस शोध के केंद्र में कान्जी (Kanzi) नाम का एक असाधारण बोनोबो था। कान्जी (28 अक्टूबर 1980 – 18 मार्च 2025) प्राइमेट संज्ञान के इतिहास में एक 'राजनेता' (Elder Statesman) की तरह था। वह एक 'एन्कल्चरेटेड' (Enculturated) वानर था, जिसका अर्थ है कि वह जन्म से ही मानवीय परिवेश और संस्कृति में पला-बढ़ा था।

  • भाषाई रिकॉर्ड: कान्जी ने 348 लेक्सिग्राम (Lexigrams) यानी शब्द-प्रतीकों में महारत हासिल की थी और वह लगभग 3,000 बोले गए अंग्रेजी शब्दों को समझने की क्षमता रखता था।
  • आदर्श विषय: अपनी 44 वर्ष की आयु तक, कान्जी ने यह सिद्ध किया कि भाषा-प्रशिक्षित वानर अपने आंतरिक मानसिक चित्रण को प्रतीकों के माध्यम से व्यक्त कर सकते हैं, जिससे वे वैज्ञानिकों के लिए 'काल्पनिक' संसार को समझने का सबसे उपयुक्त माध्यम बन जाते हैं।

कान्जी की इसी विलक्षण प्रतिभा ने शोधकर्ताओं अमालिया बास्तोस (Amalia Bastos) और क्रिस्टोफर क्रुपेन्ये (Christopher Krupenye) को 'द इमेजिनरी टी पार्टी' प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया।

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3. द इमेजिनरी टी पार्टी: प्रयोग और परिणाम

वैज्ञानिकों ने 2026 के एक अध्ययन में कान्जी के साथ 'नाटक करने' (Pretend play) की क्षमता की जाँच की। इस प्रयोग में शोधकर्ता ने कान्जी के सामने चाय पार्टी जैसा माहौल बनाया और अदृश्य वस्तुओं के साथ संवाद किया।

प्रयोग का प्रकार

विवरण

परिणाम और शुद्धता

प्रयोग 1: काल्पनिक जूस

शोधकर्ता ने एक पारदर्शी खाली जग से दो खाली कपों में जूस डालने का अभिनय किया, फिर एक कप को खाली करने का नाटक किया।

कान्जी ने 68% सटीकता के साथ उस कप को पहचाना जिसमें "काल्पनिक जूस" बचा हुआ था।

प्रयोग 2: वास्तविक बनाम काल्पनिक

कान्जी को एक असली जूस का कप और एक काल्पनिक जूस वाला कप दिखाया गया।

कान्जी ने लगभग 80% बार असली जूस चुना, जो दर्शाता है कि वह कल्पना और वास्तविकता के बीच का अंतर स्पष्ट रूप से समझता था।

प्रयोग 3: काल्पनिक अंगूर

जूस की जगह अदृश्य अंगूरों का उपयोग किया गया और उन्हें अलग-अलग जार में रखने का नाटक किया गया।

कान्जी ने सफलतापूर्वक उन जार को चिह्नित किया जहाँ काल्पनिक फल "रखे" गए थे।

इन परिणामों से स्पष्ट है कि कान्जी केवल नकल नहीं कर रहा था, बल्कि वह 'एक्टिंग एज इफ' (Acting as if) के सिद्धांत पर काम कर रहा था—यानी वह अपने मस्तिष्क में एक अदृश्य वस्तु का प्रतिनिधित्व (Representation) बना रहा था।

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4. मैकक्यून के खेल के स्तर और विकासवादी तर्क

मनोवैज्ञानिक मैकक्यून (McCune) ने प्रतिनिधिक खेल (Representational play) के पाँच स्तरों का वर्णन किया है। बास्तोस और क्रुपेन्ये के शोध के अनुसार, वानरों में विकास का एक सुदृढ़ तीन-चरणीय क्रम (3-step sequence) देखा गया:

  1. स्तर 1-4 (प्रतिनिधित्व बिना नाटक): वानर वस्तुओं के उपयोग को समझते हैं (जैसे कंघी से बाल संवारना), लेकिन यह केवल भौतिक स्मृति पर आधारित हो सकता है।
  2. स्तर 5 (पदानुक्रमित नाटक - Hierarchical Pretend): यह सबसे उच्च स्तर है जहाँ एक आंतरिक योजना (Internal plan) के आधार पर कार्य किया जाता है। यहाँ एक वस्तु को दूसरी वस्तु मान लेना या अदृश्य वस्तु का निर्माण करना शामिल है।

"कान्जी द्वारा प्रदर्शित प्रतिनिधिक खेल की यह क्षमता यह संकेत देती है कि कल्पना के बीज 6 से 9 मिलियन वर्ष पूर्व हमारे और वानरों के साझा पूर्वजों में ही बो दिए गए थे। यह हमारे विकासवादी इतिहास की एक साझा विरासत है।" — बास्तोस और क्रुपेन्ये (2026)

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5. वैज्ञानिक संदेह और आलोचनात्मक दृष्टिकोण

वैज्ञानिक प्रगति आलोचना के बिना अधूरी है। डैनियल पोविनेली (Daniel Povinelli) और माइकल टोमासेलो (Michael Tomasello) जैसे विशेषज्ञों ने कान्जी के प्रदर्शन पर महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं:

  • हालिया स्पर्श का नियम (Recency of Touch): पोविनेली का तर्क है कि कान्जी शायद केवल उस कप को चुन रहा था जिसे शोधकर्ता ने अंत में छुआ था, न कि अपनी कल्पना का उपयोग कर रहा था। यह एक 'निम्न-स्तरीय नियम' (Low-level rule) हो सकता है।
  • स्वयं पहल की कमी (Lack of Initiation): टोमासेलो का कहना है कि वे तब तक पूरी तरह आश्वस्त नहीं होंगे जब तक वे कान्जी को स्वयं (बिना मानवीय इशारे के) जूस डालने का 'नाटक' शुरू करते हुए न देख लें। क्या वह केवल प्रतिक्रिया दे रहा था या वास्तव में खेल का सृजन कर रहा था?

इन बहसों के बावजूद, कान्जी का योगदान प्राइमेट कॉग्निशन को मशीनी व्यवहार से ऊपर उठाकर एक समृद्ध मानसिक प्रक्रिया के रूप में स्थापित करता है।

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6. निष्कर्ष: एक समृद्ध मानसिक जीवन का अनावरण

कान्जी के साथ किए गए ये प्रयोग हमें बताते हैं कि 'कल्पना' केवल मनुष्य होने की शर्त नहीं है। संज्ञानात्मक वैज्ञानिक कैथल ओ'माडागाइन (Cathal O'Madagain) के अनुसार, कल्पना ही आविष्कार (Invention) की जननी है। वे कहते हैं, "यदि आप साइकिल की कल्पना नहीं कर सकते, तो आप उसका आविष्कार भी नहीं कर सकते।"

मुख्य टेकअवे:

  • वानरों के पास एक "सुंदर और समृद्ध मानसिक जीवन" है जो वर्तमान की सीमाओं में कैद नहीं है।
  • कल्पना और वास्तविकता के बीच संतुलन बनाने की क्षमता हमारे साझा विकासवादी इतिहास का हिस्सा है।

एक शैक्षिक डिजाइनर के रूप में, यह अध्ययन हमें प्रेरित करता है कि हम अन्य प्रजातियों को केवल जैविक मशीनें न समझें, बल्कि उन्हें उन प्राणियों के रूप में देखें जो हमारे साथ एक गहरी मानसिक और विकासवादी कड़ी साझा करते हैं। यह बोध उनके संरक्षण और सम्मान की दिशा में हमारी जिम्मेदारी को और भी बढ़ा देता है।