बंदरों के समाज के 4 हैरान करने वाले सच: प्यार, राजनीति और छिपी हुई हिंसा
जब हम जंगलों में प्राइमेट्स के झुंड को देखते हैं, तो सतह पर उनका व्यवहार सामाजिक सहयोग और आपसी देखभाल जैसा प्रतीत होता है। लेकिन एक विकासवादी जीवविज्ञानी (Evolutionary Biologist) के रूप में, मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूँ कि यह दृश्य भ्रामक है। हालिया वैज्ञानिक शोध—विशेष रूप से चाकमा बबून (Papio ursinus) और हमाद्रियास बबून (Papio hamadryas) पर—यह उजागर करते हैं कि उनके समाज में हिंसा और प्रजनन रणनीतियाँ कितनी गहरी और सोची-समझी होती हैं। ये व्यवहार केवल जानवरों के स्वभाव को ही नहीं दर्शाते, बल्कि मनुष्यों के कुछ जटिल व्यवहारिक पहलुओं की विकासवादी जड़ों को समझने के लिए भी एक दर्पण प्रदान करते हैं।
1. लंबी रणनीति: 'यौन डराना-धमकाना' (Sexual Intimidation)
तुलनात्मक प्राइमेटोलॉजी (Comparative Primatology) में अब तक यह माना जाता था कि 'यौन डराना-धमकाना' (Sexual Intimidation) जैसा व्यवहार केवल चिंपांजी में पाया जाता है। हालाँकि, चाकमा बबून (Papio ursinus) पर किए गए शोध ने इस धारणा को बदल दिया है। यहाँ नर बबून 'यौन उत्पीड़न' (Sexual Coercion) के एक बहुत ही विवेकपूर्ण रूप का उपयोग करते हैं, जिसे 'लंबी रणनीति' कहा जा सकता है।
यह अल्पकालिक 'यौन उत्पीड़न' या तत्काल संभोग के लिए किया गया 'ह्रासमेंट' (harassment) नहीं है। इसके विपरीत, यह हफ़्तों पहले से की गई हिंसा है। नर बबून उन मादाओं को बार-बार निशाना बनाते हैं जो भविष्य में उनके संभोग के अवसरों को बढ़ा सकती हैं। इस आक्रामकता का उद्देश्य मादा को भविष्य में 'मेट-गार्डिंग' (mate-guarding) स्वीकार करने के लिए अनुकूलित (condition) करना है।
"अध्ययन के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि आक्रामकता और संभोग के बीच 'टेम्पोरल डिकपलिंग' (temporal decoupling) यानी समय का अंतराल होता है। नर तत्काल लाभ के बजाय भविष्य में संभोग की सफलता सुनिश्चित करने के लिए मादाओं को हफ़्तों पहले से डराना-धमकाना शुरू कर देते हैं।" (Baniel et al.)
2. चाकमा बबून: प्रजनन क्षमता की भारी कीमत
मादा चाकमा बबून के लिए उनका अपना प्रजनन चक्र अस्तित्व के लिए एक बड़ा खतरा बन जाता है। बेनियल और उनके सहयोगियों द्वारा किए गए अध्ययन के डेटा से पता चलता है कि मादाओं को लगने वाली अधिकांश चोटें किसी शिकारी द्वारा नहीं, बल्कि उनके अपने समाज के वयस्क नरों द्वारा पहुंचाई जाती हैं।
डेटा के अनुसार, मादाओं की कुल दर्ज चोटों में से 78% वयस्क नर बबून द्वारा पहुंचाई गई थीं। यह हिंसा तब चरम पर होती है जब मादा अपने 'स्वोलन' (Swollen) यानी सबसे उपजाऊ (Peri-ovulatory period) चरण में होती है। नीचे दी गई तालिका चाकमा बबून में मादा की प्रजनन स्थिति और चोट लगने की दर के बीच के खतरनाक संबंध को स्पष्ट करती है:
मादा की प्रजनन स्थिति | चोट की दर (Injuries per day) |
उपजाऊ (Swollen/POP) | 0.014 |
गैर-उपजाऊ (Non-swollen) | 0.009 |
स्तनपान कराने वाली (Lactating) | 0.005 |
गर्भवती (Pregnant) | 0.005 |
यह हिंसा न केवल मादा के दैनिक जीवन को कठिन बनाती है, बल्कि उसकी उत्तरजीविता (survival) को भी गंभीर जोखिम में डालती है।
3. 'मैथुन कॉल' (Copulation Call) का रहस्य: पितृत्व भ्रम बनाम तबादला
हमाद्रियास बबून (Papio hamadryas) में मादाएं संभोग के बाद विशिष्ट आवाजें निकालती हैं, जिन्हें 'मैथुन कॉल' कहा जाता है। आम तौर पर प्राइमेट्स में ये कॉल 'पितृत्व भ्रम' (Paternity Confusion) पैदा करने के लिए होती हैं ताकि कई नर मादा के साथ संभोग करें और कोई भी नर शिशु की हत्या न करे। लेकिन हमाद्रियास समाज 'वन-मेल यूनिट' (OMU) पर आधारित है, जहाँ पितृत्व की निश्चितता (Paternity Certainty) पहले से ही बहुत अधिक होती है।
बेलिनचोन ऑर्टिज़ के शोध के अनुसार, हमाद्रियास में ये कॉल केवल 18-26% मामलों में ही देखी जाती हैं। यहाँ इनके पीछे एक अलग विकासवादी तर्क है:
- सामाजिक स्थिति का प्रभाव: ये कॉल बड़ी यूनिट्स में 'पेरिफेरल' (किनारे वाली) मादाओं और छोटी यूनिट्स में 'सेंट्रल' (मुख्य) मादाओं द्वारा अधिक की जाती हैं।
- प्रजनन सफलता: ये कॉल अक्सर नर के स्खलन (ejaculation) से जुड़ी होती हैं।
- इकाई स्थानांतरण: हमाद्रियास में ये आवाजें मादा के एक यूनिट से दूसरी यूनिट में 'तबादले' (transfer) को बढ़ावा देने के लिए एक रणनीतिक संकेत हो सकती हैं, ताकि वे अधिक सक्षम नर की यूनिट में जा सकें।
4. अपहरण और जबरन कब्ज़ा: हमाद्रियास की कठोर पितृसत्ता
हमाद्रियास बबून का समाज 'सवाना बबून' की तुलना में कहीं अधिक पितृसत्तात्मक होता है। यहाँ नर बबून 'हर्डिंग' (herding), गर्दन पर काटने और विजुअल धमकियों के माध्यम से मादाओं की आवाजाही पर पूर्ण नियंत्रण रखते हैं।
यहाँ 'टेकओवर' (takeover) यानी जबरन कब्ज़े की प्रक्रिया अत्यंत हिंसक और मादाओं के लिए विनाशकारी होती है। जब एक नया नर किसी यूनिट पर कब्ज़ा करता है, तो मादाओं के लिए कई जैविक और शारीरिक खतरे पैदा होते हैं:
- शिशु वध (Infanticide): नए नर द्वारा पुराने नर की संतानों को मारने का उच्च जोखिम।
- गर्भपात (Pregnancy Loss): एक अनुकूलन प्रतिक्रिया के रूप में मादाएं अक्सर गर्भपात कर देती हैं क्योंकि उस संतान के बचने की संभावना कम होती है।
- लंबा अंतराल: दो जन्मों के बीच का समय (interbirth interval) बढ़ जाता है क्योंकि नई इकाई में संभोग और गर्भधारण में समय लगता है।
"हमाद्रियास समाज का ढांचा चार स्तरों पर आधारित है: वन-मेल यूनिट्स (OMUs/Harems), क्लैन्स (Clans), बैंड्स (Bands) और ट्रूप्स (Troops)। इस जटिल पदानुक्रम में सामाजिक बंधनों को नर बबून अपनी आक्रामकता के माध्यम से नियंत्रित करते हैं।"
निष्कर्ष: भविष्य की ओर एक दृष्टि
बबून के समाज में देखी जाने वाली ये 'विवेकपूर्ण' हिंसक रणनीतियाँ हमें यह सिखाती हैं कि प्रकृति में हिंसा अक्सर तात्कालिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि भविष्य के नियंत्रण और निवेश का हिस्सा होती है। चाकमा बबून की लंबी रणनीति हो या हमाद्रियास का कठोर सामाजिक ढांचा, ये सभी व्यवहार प्रजनन सफलता को अधिकतम करने की विकासवादी दौड़ का परिणाम हैं।
एक विशेषज्ञ के रूप में, मैं आपको इस गंभीर प्रश्न के साथ छोड़ता हूँ: "यदि पशु समाजों में हिंसा और डराने-धमकाने का इतना गहरा विकासवादी और रणनीतिक आधार है, तो यह हमारे अपने मानवीय व्यवहार और सामाजिक संरचनाओं की जटिलताओं को समझने के बारे में हमें क्या संकेत देता है?"